प्राचीन सभ्यताएँ नदियों के किनारे शायद उनके संसाधनों के कारण बनी थीं। इन सभ्यताओं का पानी के साथ एक अटूट रिश्ता था जो आज भी प्रासंगिक है क्योंकि यह हमें इस आवश्यक संसाधन का महत्व सिखाता है। सिंधु घाटी सभ्यता जो 2500-1700 बी.सी. के दौरान अपने चरम पर थी, जिसके प्रमुख केंद्र आधुनिक भारत और पाकिस्तान में हैं, इस संबंध का एक सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत करती है।[1] सिंधु नदी और छोटी मौसमी घग्गर-हकड़ा नदी की बदलती परिस्थितियों से प्रभावित इस सभ्यता के व्यवहार पर कई अध्ययन हुए हैं।
सभ्यता के प्रमुख केंद्रों में कालीबंगन, मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धोलावीरा, राखीगढ़ी और गनवेरीवाला शामिल हैं। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की जनसंख्या क्रमशः 23,500-35,000 और 35,000-41,250 के आसपास होने का अनुमान लगाया गया है।[1]

सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल
यह सभ्यता अपनी शहरी योजना के लिए प्रसिद्ध है और इसमें कई महत्वपूर्ण आविष्कारों के पहले दर्ज उदाहरण हैं। इन आविष्कारों में बावड़ी, सार्वजनिक स्नानघर, उदकगति अभियांत्रिकी (हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग), जल निकासी और उन्नत शौचालय शामिल हैं। इसमें विकसित जल संचयन और आपूर्ति सुविधाएँ थीं।
जलापूर्ति और कुएँ
सिंधु घाटी सभ्यता के विभिन्न स्थलों पर लोगों द्वारा कई कुएँ बनाए गए थे। इन कुओं से बस्तियों और शहरों में रहने वाले लोगों को पानी की आपूर्ति होती थी। इनमें बावड़ी और गोलाकार ईंटों से बने कुएँ शामिल थे। विशेष रूप से मोहनजोदड़ो में 700 से अधिक कुएँ होने की संभावना है।[2]

लोथल और धोलावीरा में कुऍं

मोहनजोदड़ो में ऊँचा कुआँ और हड़प्पा में कुआँ
स्वच्छता सुविधाएँ और जल निकासी व्यवस्था
सिंधु घाटी सभ्यता में प्राचीन दुनिया की कुछ सबसे विकसित स्वच्छता सुविधाएँ थीं।[3]
शहरों में कई घर स्नानघरों से सुसज्जित थे। ये स्नानघर अपशिष्ट जल को निकालने के लिए नालियों से जुड़े थे। यह नालियाँ बड़ी सार्वजनिक नालियों से जुड़ी हुई थीं, जो अक्सर ढंकी होती थी और सटीक ढंग से ईंट बिछाने से बनी होती थीं। पानी को टेरा-कोटा पाइपों के माध्यम से भी ले जाया जाता था, जो वर्तमान समय में बरक़रार पाए गए हैं। अपशिष्ट जल और मल-जल को अक्सर भूमिगत गड्ढों या घड़ों में एकत्र किया जाता था, जिन्हें संभवतः समय-समय पर साफ़ किया जाता था।[3],[4] मानसून के पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए नालियों के सबूत मिले हैं।[5]

हड़प्पा और लोथल में जल निकासी व्यवस्था

लोथल में स्नानघर की संरचना
सांस्कृतिक जल से संबंधित संरचनाएँ
मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानघर दुनिया के सबसे पुराने सार्वजनिक टैंकों में से एक है। यह तीसरी सहस्राब्दी बी.सी.ई. है। इसका आधार बिटुमेन से बना है और इसे जलरोधक बनाया गया है। विशाल स्नानघर का सटीक उद्देश्य अभी तक पता नहीं चला है।[5],[6] लेकिन कुछ विद्वानों का सुझाव है कि इसका उपयोग औपचारिक या धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जाता था।[2] इससे पता चलता है कि प्राचीन काल में भी जल और जल निकायों को कितना महत्व दिया जाता था।

मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानघर
जल संचयन संरचनाएँ
सिंधु घाटी सभ्यता में कई जलाशय हैं, जिनका निर्माण संभवतः वर्षा जल संचयन के उद्देश्य से किया गया था। विशेष रूप से धोलावीरा में पत्थरों से बने कई जलाशय थे।[2] ये आमतौर पर टैंकों के रूप में होते थे जिनमें पानी के स्तर तक पहुँचने के लिए किनारे पर सीढ़ियाँ होती थी। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में भी जलाशयों के प्रमाण मिलते हैं।[7]
विद्वानों ने संभावना जताई है कि मोहनजोदड़ो के विशाल स्नानघर का उपयोग भी वर्षा जल एकत्र करने के लिए किया जाता था।[2]

धोलावीरा में जलाशय
यह अनुमान लगाया गया है कि कुछ स्थलों पर जल संसाधनों का सूखना और अन्य में बाढ़ आना सभ्यता के पतन का एक प्रमुख कारण था।[8] यह हमें पानी के संसाधन की सराहना करने और इसे विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करने तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने की चेतावनी देता है।
हम अतीत से बहुत कुछ सीख सकते हैं। हज़ारों सालों पहले ऐसे विकसित जल संसाधन बनाए जा सकते थे और स्वच्छता सुविधाएं प्रदान की जा सकती थीं। यदि यह उस समय किया गया था जब वैज्ञानिक प्रगति सीमित थी, तो निश्चित रूप से, हम अब बेहतर करने का प्रयास कर सकते हैं। यदि प्राचीन लोगों के पास जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन की दूरदर्शिता होती, तो हम इन उद्देश्यों के प्रति अधिक दृढ़ संकल्प दिखा सकते हैं।
सन्दर्भ
- Britannica Encyclopaedia: Indus Civilisation, https://www.britannica.com/topic/Indus-civilization
- History of Ancient and Early Medieval India: From the Stone Age to the 12th Century, Upinder Singh, Pg. 149-155 and Chapter 4, https://books.google.co.in/books?id=H3lUIIYxWkEC&source=gbs_navlinks_sA
- Sewerage in Ancient and Mediaeval Times, Harold Farnsworth Gray, Sewage Works Journal, Vol. 12, No. 5 (Sep., 1940), pp. 939-946 (8 pages), https://www.jstor.org/stable/25029094
- Civilisations of the Indus Valley and Beyond, Wheeler, Mortimer, https://www.indianculture.gov.in/ebooks/civilizations-indus-valley-and-beyond-0
- Indus Valley Civilisation- ISBN 978-92-3-102719-2, A. H. Dani and B.K. Thapar, https://en.unesco.org/silkroad/sites/default/files/knowledge-bank-article/vol_I%20silk%20road_the%20indus%20civilization%20BIS.pdf
- Britannica Encyclopaedia: Great Bath, https://www.britannica.com/place/Great-Bath-Mohenjo-daro
- Public Health Engineering Department, Government of Meghalaya: Rainwater Harvesting, https://megphed.gov.in/rainwater/Chap2.pdf
- Andrew Lawler, Indus Collapse: The End or the Beginning of an Asian Culture?, Science320,1281-1283(2008). DOI:10.1126/science.320.5881.1281
- Image Credit- Major Sites of Indus Valley Civilisation Image modified from:
- Indus Valley Civilisation Mature Phase Map- Via Wikimedia Commons, Author: Avantipura7
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- Harappan Terra-cotta toys- Author: Trish Mayo
- Granary and Great Hall at Harappa- Via Wikimedia Commons, Author: Muhammad Bin Naveed
- Rakhigarhi Archaeological Site- Via Wikimedia Commons, Author: Durgeshkushvaha
- Ancient Female Skeleton found at Rakhigarhi- Via Wikimedia Commons, Author: Nomu420
- Kalibangan Painted Pottery Pieces- ASI, Ministry of Culture, GOI
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- Pot Furnace at Lothal- Via Wikimedia Commons, Author: Prof Ranga Sai
- Seals at Lothal- ASI, Ministry of Culture, GOI
- East Gate at Dholavira- Via Wikimedia Commons, Author: Rahul Zota
Well at Lothal- Via Wikimedia Commons, Author: Bernard Gagnon, Well at Dholavira- Via Wikimedia Commons, Author: Prof Ranga Sai, Well at Mohenjo-daro- Via Wikimedia Commons, Author: Usman.pg, Well at Harappa- Via Wikimedia Commons, Author: Obed Suhail, Drainage System in Harappa- Via Wikimedia Commons, Author: Haseeb Ur Rehman malik, Drainage System in Lothal- Via Wikimedia Commons, Author: Abhilashdvbk, Bathroom Structure in Lothal- Via Wikimedia Commons, Author: Bernard Gagnon, Great Bath- Via Wikiemdia Commons, Author: Saqib Qayyum, First Reservoir at Dholavira- Via Wikimedia Commons, Author: Bhajish Bharathan, Second Reservoir at Dholavira- Via Wikimedia Commons, Author: Lalit Gajjer
10. Creative Commons License Information: https://creativecommons.org/share-your-work/cclicenses/






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