हर साल हमारे समुद्र तल की ऊंचाई औसतन 3.2 मिमी बढ़ रही है। इसके पीछे दो खास कारण हैं। पहला भूमि पर मौजूद ग्लेशिएर व आइस शीट्स का पिघलना और दूसरा तापमान में बढ़ोतरी की वजह से समुद्र के पानी का फैलना। इन दोनों में से पहला समुद्र सतह की करीब दो तिहाई बढ़ोतरी के लिए ज़िम्मेवार है। ग्रीन हाउस गैसों के लगातार बढ़ते उत्सर्जन के कारण पृथ्वी के वातावरण में हीट या ऊष्मा ट्रेप होटी है, उसका 90% तक समुद्र सोख लेते हैं। इससे पानी का तापमान बढ़ता है और वो फैलता है। इस प्रक्रिया के तहत तापमान बढ्ने से होने वाला पानी का फैलाव समुद्र सतह की बाकी के एक तिहाई बढ़ोतरी के लिए ज़िम्मेवार है।

इस दिशा में ज्यादा सटीक ज्ञान हासिल करने के लिए 1990 के दशक की शुरुआत में अन्तरिक्ष से महासागरों की सतह पर निगाह रखना शुरू किया गया। समुद्रों की सतह पर निगरानी रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे महासागरों की तरंगों और चक्रवात आदि के बारे में पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन तीन दशकों में समुद्र सतह के बढ्ने की दर दुगनी हो चुकी है। ये जानकारी बहुत मार्के की है क्यूंकी समुद्र तट आम जिंदगी पर सीधे तौर पर असर डालते हैं।

इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव 21 नवम्बर 2020 को आया जब कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग वायु सेना बेस से ‘सेंटीनल 6 माइकल फ्रीलिच’ नाम के सैटेलाइट को लॉन्च किया गया। इसका मकसद समुद्र सतह की ऊंचाई और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ जैसे कि समुद्र की सतह पर चलने वाली हवा की तीव्रता और उसमें उठने वाली तरंगों की ऊंचाई मापना है। यह सैटेलाइट दुनिया की समुद्री सतह के लगभग 90% भाग पर निगाह रखेगा। यह समुद्र और मौसम के पूर्वानुमान को बेहतर बनाने में मददगार होगा।

लॉंच के कुछ समय बाद ही सेंटीनल 6 माइकल फ्रीलिच अपने कक्ष में स्थापित हो गया और समुद्र सतह को मॉनिटर करने वाले मौजूदा रिफ्रेन्स सैटेलाइट जेसन-3 से 30 सेकंड के अंतराल पर पृथ्वी के चक्कर काटने लगा। इसके बाद वैज्ञानिकों और इंजीनियर, दोनों से मिलने वाले आंकड़ों को क्रॉस कैलिब्रेट करने के काम में लग गए। यह बेहद जरूरी है जिससे दोनों से मिलने वाले आंकड़ों में निरंतरता बने। एक बार जब वे सेंटीनल 6 माइकल फ्रीलिच से मिलने वाले आंकड़ों से संतुष्ट हो जाएंगे तो सेंटीनल 6 माइकल फ्रीलिच अपने पूर्ववर्ती जेसन-3 का स्थान ले लेगा और मुख्य सैटेलाइट बन जाएगा। हालांकि इसमें अभी कई महीनों का समय लगेगा। 

नासा की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 6 महीने तक की जांच और कैलिब्रेशन के बाद सेंटीनल 6 माइकल फ्रीलिच से समुद्र तल की ऊंचाई से संबन्धित डेटा (जिसे एल्टिमेट्री डेटा कहा जाता है) 22 जून को इसके उपयोगकर्ताओं तक पहुँच जाएगा। सेंटीनल 6 माइकल फ्रीलिच में मौजूद इन्स्ट्रूमेंट्स इस डेटा को एकत्रित करने के कुछ घंटों के भीतर ही ये जानकारी लोगों तक पहुंचा देगा।  समुद्र सतह की ऊंचाई से संबन्धित आंकड़ों की पहली श्रेणी 2.3 इंच (5.8 सेंटीमीटर) तक सही (शुद्ध) होगी। दूसरी श्रेणी का डेटा जो कि 1.4 इंच (3.5 सेंटीमिटर) तक सटीक होगा, मिलने के दो दिन के बाद लोगों तक पंहुचेगा। अन्य डेटासेट को, जो 1.2 इंच तक सटीक होगा, इस साल के अंत तक जारी किया जाएगा। यह शोध कार्यों और क्लाइमेट विज्ञानैयों के लिए खास महत्व का होगा जिनकी दिलचस्पी समुद्रों की ऊंची होती सतह और उसके व्यापक प्रभाव पर है ।

इस सैटेलाइट से मिलने वाले आंकड़ों को अन्य सैटेलाइटों (जैसे GRACE-FO and IceSat-2) से मिलने वाले आंकड़ों से मिलाया जाएगा और वैज्ञानिक ये बात पुख्ता तौर पर बता पाएंगे कि समुद्र तट की ऊंचाई में बढ़ोत्तरी में कितना हाथ बरफ के पिघलने का है और कितना गरमाने की वजह से समुद्र के पानी के फैलने का। इसके आंकड़े इस्तेमाल करके वैज्ञानिक बेहतर तरीके से आंकलन कर पाएंगे कि पृथ्वी किस तरह बदल रही है।

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