पेरिस स्थित अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान (आईईए) द्वारा हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वर्ष २०१८ में भारत ने कुल २,२९९ मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन किया । यह वर्ष २०१७ की तुलना में ४.८ % ज्यादा था। हालांकि कार्बन उत्सर्जन में इस बढ़ोत्तरी के बावजूद भी भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दुनिया के औसत प्रति व्यक्ति उत्सर्जन से करीब ४०% तक कम ही रहा ।

रपट के अनुसार दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन का करीब ७% उत्सर्जन भारत में हुआ । वहीं अमेरिका ने, जो दुनिया में कार्बन उत्सर्जन के मामले में सबसे अव्वल है, दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन में १४% बढ़ोत्तरी की।

भारत ने ‘संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज’ से जलवायु परिवर्तन संबंधी अपनी प्रतिबध्ध्ताएँ साझा की हुई हैं। जिनके अनुसार भारत का लक्ष्य सन २०३० तक सन २००५ की तुलना में अपनी उत्सर्जन तीव्रता को सकल घरेलू उत्पाद के हिसाब से ३०-३३% तक कम करना है। इसके अलावा अपने ऊर्जा भंडार में ४०%  तक अक्षय ऊर्जा को बढ़ाने के साथ ही साथ देश में २०२२ तक १०० गेगा वाट सौर ऊर्जा इनस्टॉल करने की भी योजना है।

भारत का कहना है कि उसे अपनी जलवायु सम्बन्धी वायदों को पूरा करने के लिए कम से कम २.५ ट्रिलियन डालर कि जरुरत है. गौरतलब है कि सभी विकासशील देशों को अपने अपने वायदों को पूरा करने के लिए कुल जितने धन कि जरुरत है ये उसका ७१% है।

रिपोर्ट के अनुसार २०१० से दुनिया में ऊर्जा का उपभोग जिस दर से बढ़ रहा था उसकी तुलना में २०१८ में दुनिया के ऊर्जा उपभोग की दर लगभग दो गुनी रही। अर्थव्यवस्था में तेजी और दुनिया के अनेक  हिस्सों में घरों और व्यावसायिक जगहों को ठंडा रखने या गरम रखने की बढ़ती हुई जरूरतें भी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार रहीं। इस दौरान नेचुरल गैस से लेकर सभी तरह के जीवाश्म ईंधनों की मांग में बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी। यहाँ तक कि सौर और पवन ऊर्जा ने भी मांग में अच्छा खासा उछाल देखा।

रिपोर्ट के अनुसार केवल ऊर्जा उपभोग में बढ़ोत्तरी के चलते पिछले साल ऊर्जा से संबन्धित कार्बन उत्सर्जन में १.७% की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी और ये ३३.१ बिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।

हालांकि ऊर्जा की सभी क़िस्मों की मांग बढ़ी है पर सबसे ज्यादा मांग बिजली की बढ़ी है। जहां सभी तरह के जीवाश्म ईंधनों की वजह से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोत्तरी देखी गयी, अकेले बिजली का उत्सर्जन को बढ़ाने में दो तिहाई से भी ज्यादा का योगदान रहा । बिजली बनाने में कोयले के इस्तेमाल से ही १० गेगा टन से भी ज्यादा कार्बन उत्सर्जन हुआ । इसमें सबसे ज्यादा भाग एशिया का रहा । अकेले चीन, भारत और अमेरिका का इस उत्सर्जन को बढ़ाने में ८५ % से भी ज्यादा का योगदान रहा वहीं जर्मनी, जापान, मेक्सिको, फ़्रांस और यू के में उत्सर्जन में गिरावट देखी गयी ।

तेल और गैस की सबसे ज्यादा मांग अमेरिका में बढ़ी। वहाँ २०१९ में गैस का उपभोग २०१७ की तुलना में १०% तक बढ़ गया। आईईए ने जब से रिकॉर्ड (१९७१) सरखने शुरू किये हैं ये तब से अब तक का सबसे बड़ा उछाल है।

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